
पांच लाख श्लोकों वाले महाभारत का सार मात्र नौ पंक्तियों में समझें :
हर सीख महाभारत के एक पात्र या व्यक्तित्व के साथ जुड़ी है… !!
- अगर आप समय रहते अपने बच्चों की अनुचित मांगों और इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रखते हैं,
तो आप जीवन में असहाय हो जाएंगे…
“कौरव” - आप चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अगर आप अधर्म का साथ देंगे,
तो आपकी ताकत, हथियार, कौशल और आशीर्वाद सब बेकार हो जाएंगे…
“कर्ण” - अपने बच्चों को इतना महत्वाकांक्षी न बनाएं कि वे अपने ज्ञान का दुरुपयोग करें
और कुल विनाश का कारण बनें…
“अश्वत्थामा” - कभी भी ऐसे वादे न करें कि आपको अधर्मियों के सामने आत्मसमर्पण करना पड़े…
“भीष्म” पितामह” - धन, शक्ति, अधिकार का दुरुपयोग और गलत काम करने वालों का समर्थन अंततः पूर्ण विनाश की ओर ले जाता है…
“दुर्योधन” - सत्ता की बागडोर कभी भी किसी अंधे व्यक्ति को न सौंपें,
अर्थात जो स्वार्थ, धन, अभिमान, ज्ञान, आसक्ति या वासना से अंधा हो, क्योंकि यह विनाश की ओर ले जाएगा…
“धृतराष्ट्र” - यदि ज्ञान के साथ बुद्धि भी हो, तो आप निश्चित रूप से विजयी होंगे…
“अर्जुन” - छल आपको हर समय सभी मामलों में सफलता नहीं दिलाएगा…
“शकुनि” - यदि आप नैतिकता, धर्म और कर्तव्य को सफलतापूर्वक बनाए रखते हैं,
तो दुनिया की कोई भी शक्ति आपको नुकसान नहीं पहुँचा सकती…
“युधिष्ठिर”
सर्वे भवन्तु सुखिनः – सर्वे सन्तु निरामयाः।


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