आँसू ( कुछ शायरियाँ )

- मत पूछो ये इश्क कैसा होता है,
बस यहीं समझ लीजिए , जो रूलाता है ना,
उसे ही गले लगाकर रोने को जी चाहता है।
- हमें क्या पता था मौसम ऐसे रो पड़ेगा,
हमने तो आसमान को बस अपनी दास्तां सुनाई थी।
- जिनके प्यार बिछड़े है, उनका सुकून से क्या ताल्लुक़,
उनकी आँखों में नींद नहीं, सिर्फ आँसू आया करते है। - सोचा ही नहीं था जिंदगी में ऐसे भी फ़साना होगा,
रोना भी जरुरी होगा और आंसू भी छुपाने पड़ेंगे। - आंसुओं की कीमत वो क्या जाने, जो हर बात पे आंसू बहाते है,
इसकी कीमत तो उनसे पूंछो, जो ग़म में भी मुस्कुराते है।
- काश बनाने वाले ने हमको आँसू बनाया होता, और मेहबूब की आँखों में बसाया होता,
जब गिरते उनकी आँखों से उनकी ही गोद में, तो मरने का मज़ा कुछ अलग ही आया होता।

