
पसंद का विरोधाभास
पसंद का विरोधाभास यह विचार है कि बहुत अधिक विकल्प होने से कम खुशी और संतुष्टि हो सकती है।
हालाँकि ऐसा लग सकता है कि अधिक विकल्प होने से चयन करना आसान हो जाता है, बहुत अधिक विकल्प होने से तनाव और परेशानी हो सकती है।
इससे चिंता, अवसाद और फंसे होने की भावना पैदा हो सकती है।
एक कहानी :
एक बार की बात है, एक छोटा लड़का था जिसका नाम रवि था। रवि को चॉकलेट बहुत पसंद थी। वह हर दिन चॉकलेट खाता था। एक दिन, रवि की मां ने उसे दो अलग-अलग प्रकार की चॉकलेट खरीदकर दीं। एक चॉकलेट बहुत लोकप्रिय थी, जबकि दूसरी बहुत कम लोकप्रिय थी।

रवि ने लोकप्रिय चॉकलेट को पहले खाया। उसे यह बहुत पसंद आया। फिर उसने कम लोकप्रिय चॉकलेट को खाया। उसे यह भी पसंद आया, लेकिन लोकप्रिय चॉकलेट की तुलना में थोड़ा कम।
रवि ने अपने दोस्तों से पूछा कि उन्हें कौन सी चॉकलेट पसंद है। उसके दोस्तों ने कहा कि उन्हें लोकप्रिय चॉकलेट पसंद है। रवि को यह सुनकर आश्चर्य हुआ। उसने सोचा कि वह भी लोकप्रिय चॉकलेट को सबसे ज्यादा पसंद करेगा।
रवि ने फिर से दोनों चॉकलेट खाया। इस बार, उसे लोकप्रिय चॉकलेट और भी अधिक पसंद आई। उसे लगा कि यह चॉकलेट बहुत ही स्वादिष्ट है। वह कम लोकप्रिय चॉकलेट को उतना पसंद नहीं करता था।
रवि को समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हुआ। वह पहले कम लोकप्रिय चॉकलेट को अधिक पसंद करता था। लेकिन अब वह लोकप्रिय चॉकलेट को अधिक पसंद करता है।
रवि ने अपने शिक्षक से इस बारे में बात की। शिक्षक ने उसे समझाया कि यह पसंद का विरोधाभास है। पसंद का विरोधाभास एक मानसिक अवस्था है जिसमें एक व्यक्ति किसी चीज़ को तब पसंद करने लगता है जब उसे यह पता चलता है कि कोई और भी उसे पसंद करता है।
रवि को अब समझ आ गया था कि ऐसा क्यों हुआ। वह लोकप्रिय चॉकलेट को अधिक पसंद करने लगा था क्योंकि उसने देखा था कि उसके दोस्त भी इसे पसंद करते हैं।
रवि ने अपने पसंद को बदलने का फैसला किया। उसने कम लोकप्रिय चॉकलेट को खाने का फैसला किया। वह चाहता था कि वह अपनी खुद की पसंद बना सके।
रवि ने कम लोकप्रिय चॉकलेट को लगातार खाने का फैसला किया। उसने जल्द ही पाया कि वह इसे पसंद करने लगा है। उसे लगा कि यह चॉकलेट भी उतनी ही स्वादिष्ट है जितनी लोकप्रिय चॉकलेट है।
रवि ने पसंद का विरोधाभास को हराया था। उसने अपनी खुद की पसंद बना ली थी।
Paradox Of Choice या पसंद के विरोधाभास को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि हम एक कार खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, तो हम एक कार को अधिक पसंद करने की अधिक संभावना रखते हैं यदि हमें एक कम वांछनीय कार के साथ तुलना की जाती है। यह हमें एक ऐसे विकल्प को चुनने के लिए प्रेरित कर सकता है जो हमारे वास्तविक हितों या आवश्यकताओं के अनुरूप न हो।
पसंद के विरोधाभास को कम करने के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम निर्णय लेने से पहले विभिन्न विकल्पों को ध्यान से सोचें और उन्हें एक-दूसरे के साथ तुलना न करें। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि एक विकल्प का वांछनीय होना दूसरा विकल्प अच्छा नहीं बनाता है।
नीचे दर्शाया गया विडियो स्टीव जॉब्स के बारे में है, जो है PARADOX OF CHOICE ।

